फीचर्ड पोस्टवैदिक और पश्चिमी ज्योतिष: अंतर सरल भाषा में
निरयण और सायन राशि, अयनांश, कुंडली की सेटिंग और व्याख्या के अंतर को उदाहरण सहित समझें। जानें कि गणना की सटीकता और भविष्यवाणी अलग प्रश्न क्यों हैं।
सूर्य, चंद्र, लग्न, दशा और मिलान को उदाहरणों के साथ समझें। हर लेख में खगोलीय गणना, पारंपरिक नियम और उनकी व्याख्या को अलग पढ़ें। किसी एक योग या अंक से पूरे जीवन का निष्कर्ष नहीं निकलता।
फीचर्ड पोस्टनिरयण और सायन राशि, अयनांश, कुंडली की सेटिंग और व्याख्या के अंतर को उदाहरण सहित समझें। जानें कि गणना की सटीकता और भविष्यवाणी अलग प्रश्न क्यों हैं।
वैदिक ज्योतिषबारह भावों के पारंपरिक अर्थ, पूर्ण-राशि भाव-पद्धति और भावेश को उदाहरण से समझें। जानें कि खाली भाव और राशि-भाव का अंतर कैसे पढ़ें।
वैदिक ज्योतिषजन्म विवरण जाँचना, लग्न पहचानना, राशि-भाव अलग समझना, भावेश और दशा पढ़ना सीखें। एक उदाहरण से कुंडली का अर्थ समझें, जल्दबाज़ी में भविष्यवाणी न करें।
वैदिक ज्योतिषनवग्रह के पारंपरिक अर्थ, राशि-स्वामित्व और कुंडली का संदर्भ समझें। जानें कि राहु-केतु बिंदु क्यों हैं और उपायों को विकल्प के रूप में कैसे देखें।
वैदिक ज्योतिष2025–2026 में लाहिरी पद्धति की शनि स्थिति और संबंधित चंद्र राशियाँ जानें। साढ़े साती के तीन चरण, वक्री गति और इस नाम की सीमाएँ समझें।
ग्रह गोचरजून 2026 के गोचर का संशोधित संग्रह: लाहिड़ी निरयन गणना, भारतीय मानक समय की तिथियाँ और व्यक्तिगत फलित की सीमाएँ।
ग्रह गोचरचंद्र राशि से साढ़ेसाती की गणना, तिथियों का अंतर और भय या निश्चित भविष्यवाणी के बिना इस पारंपरिक अवधि को समझें।
संबंध ज्योतिषअष्टकूट की आठ श्रेणियाँ, 36 अंकों का योग और गुण-मिलान को सफल विवाह की संभावना समझने की भूल जानें।
कुंडली दोषमंगल दोष का नियम, पद्धतियों में मतभेद और मंगल की स्थिति से जीवनसाथी को खतरा मानने की भूल का सरल विवेचन।
योग एवं ग्रहस्थितिविपरीत राजयोग में षष्ठ, अष्टम और द्वादश भावेश का संबंध समझें और जानें कि योग मिलने से अचानक धन का वचन क्यों नहीं मिलता।
कुंडली दोषकालसर्प के ग्रह-घेरे की गणना, राहु-केतु और सीमा-नियमों के मतभेद तथा भयपूर्ण फलित और महँगे उपायों की सीमा समझें।
दशा एवं फलितविंशोत्तरी का ग्रह-क्रम, चंद्र नक्षत्र से आरंभ, जन्मदशा का शेष और अंतर्दशा की गणना समझें; 120 वर्ष जीवन-अवधि की भविष्यवाणी नहीं हैं।
ज्योतिष के आधारलग्न क्या मापता है, जन्मसमय और स्थान क्यों जरूरी हैं तथा चंद्र और सूर्य राशि से इसका भेद समझें।
ग्रह गोचरराहु-केतु की खगोलीय चंद्रपात-स्थिति, मध्य और स्पष्ट पात तथा इच्छा-विरक्ति की पारंपरिक व्याख्या का भेद समझें।
ग्रह गोचरबुध वक्री की वास्तविक दृश्य गति, राशि-प्रवेश से उसका अंतर और तिथि के नाम से अधिक तथ्य जाँचने का महत्व समझें।
पारंपरिक उपायलाल किताब के उपायों की अलग परंपरा, प्रतीक और सिद्ध प्रभाव का भेद तथा भय और महँगे वादों के बिना स्वैच्छिक अभ्यास समझें।