क्या यह पूरा 36 गुण का मिलान है?
नहीं। यहाँ दो जन्म नक्षत्रों से मिलने वाले चार कूट दिखाए गए हैं: तारा, योनि, गण और नाड़ी। इनका अधिकतम योग 21 है। पूरे अष्टकूट मिलान के लिए दोनों व्यक्तियों की जन्म जानकारी चाहिए।
जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, वह जन्म नक्षत्र कहलाता है। यहाँ श्रवण और उत्तर भाद्रपद के लिए Anantrix की घोषित पद्धति से चार कूट की गणना है। यह पूरी जन्मपत्री का मिलान नहीं है।
16.5–17.5 / 21
तारा 1.5/3, योनि 2/4, गण 5–6/6 और नाड़ी 8/8।
पहले नक्षत्र को 1 मानकर दूसरे तक गिनते हैं। 27 नक्षत्रों के क्रम के बाद फिर शुरुआत आती है। गिनती को 9 से भाग देने पर बचा शेष तारा बताता है; शेष 0 को 9 माना जाता है। इस पद्धति में 3, 5 और 7 प्रतिकूल हैं। प्रत्येक अनुकूल दिशा के 1.5 अंक हैं।
श्रवण: वानर। उत्तर भाद्रपद: गौ। चुनी हुई तालिका में इस जोड़ी के 2/4 अंक हैं।
यह प्रतीक-आधारित वर्गीकरण है। इससे किसी व्यक्ति का वास्तविक स्वभाव, लैंगिक पहचान या व्यवहार तय नहीं होता। Anantrix यहाँ एक सममित तालिका इस्तेमाल करता है: नामों का क्रम उलटने से योनि अंक नहीं बदलते। सभी परंपराओं की तालिकाएँ एक जैसी नहीं हैं।
श्रवण का गण देव और उत्तर भाद्रपद का गण मनुष्य है। ये पारंपरिक समूह हैं; इनमें कोई व्यक्ति श्रेष्ठ या बुरा नहीं होता।
किसी भी पाठक की पहचान या रिश्ते की भूमिका मान लेने के बजाय दोनों स्थितियाँ दिखाई गई हैं। ऊपर योग में दिया दायरा केवल इसी गण-अंतर को दर्शाता है।
श्रवण: अन्त्य नाड़ी। उत्तर भाद्रपद: मध्य नाड़ी। अलग नाड़ी होने से इस नियम में 8/8 अंक मिलते हैं।
नाड़ी को स्वास्थ्य, संतान, रक्त समूह या आनुवंशिक अनुकूलता की रिपोर्ट न समझें। पारंपरिक दोष-निवारण का अपवाद जाँचना हो तो चंद्र राशि और चरण सहित पूरी जन्म जानकारी चाहिए। केवल जन्म नक्षत्र से अपवाद घोषित करना ठीक नहीं है।
पहले दोनों जन्म नक्षत्र सही होने की पुष्टि करें। जन्म समय अज्ञात हो तो चंद्रमा एक ही दिन में चरण या नक्षत्र बदल सकता है। उसके बाद ऊपर प्रत्येक कूट का कारण पढ़ें; केवल कुल अंक देखकर निष्कर्ष न निकालें।
रिश्ते पर बातचीत में जीवन की अपेक्षाएँ, पैसों का प्रबंधन, परिवार की सीमाएँ और असहमति सुलझाने का तरीका जैसे वास्तविक सवाल पूछें। ज्योतिषीय वर्गीकरण इस बातचीत का विकल्प नहीं है।
पूरे 36 गुण के मिलान में शेष चार कूट के लिए चंद्र राशि और अन्य जन्म-आधारित जानकारी चाहिए। मंगल की स्थिति, दशा और सातवें भाव का विश्लेषण भी इस चार-कूट योग का हिस्सा नहीं है।
पूरे 36 गुण की निःशुल्क गणना करें (अंग्रेज़ी)नहीं। यहाँ दो जन्म नक्षत्रों से मिलने वाले चार कूट दिखाए गए हैं: तारा, योनि, गण और नाड़ी। इनका अधिकतम योग 21 है। पूरे अष्टकूट मिलान के लिए दोनों व्यक्तियों की जन्म जानकारी चाहिए।
गण की पारंपरिक तालिका में वर और वधू की भूमिका बदलने से अंक बदल सकते हैं। इसलिए दोनों दिशाएँ दिखाई गई हैं। नाड़ी दोष के अपवाद या दूसरी परंपरा के नियम इस दायरे में शामिल नहीं हैं।
नहीं। यह पारंपरिक वर्गीकरण है, चिकित्सा, प्रजनन या आनुवंशिक जाँच नहीं। स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए योग्य चिकित्सक से सलाह लें।
सिर्फ इन अंकों से विवाह का निर्णय न लें। सहमति, सम्मान, सुरक्षा, संवाद, साझा अपेक्षाएँ और वास्तविक व्यवहार का अलग महत्व है। पूरा जन्म चार्ट भी किसी रिश्ते की सफलता की गारंटी नहीं देता।
प्रकाशक: Anantrix। यह पारंपरिक संदर्भ है, वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं। सुधार सुझाएँ।