वैदिक अर्थ और उसका संदर्भ
वृषभ का स्वामी शुक्र है। यहाँ सूर्य की व्याख्या उद्देश्य और जिम्मेदारी के साथ मूल्यों, सुविधा और टिकाऊ प्रयासों को जोड़ती है। निष्कर्ष से पहले शुक्र और सूर्य दोनों की पूरी स्थिति देखनी होती है।
वृषभ स्थिर पृथ्वी राशि है। स्थिर एक पारंपरिक वर्ग है, बदल न सकने वाला व्यक्तित्व नहीं।
एक सरल उदाहरण
पुरानी जिम्मेदारी की समीक्षा में देखें कि क्या सचमुच उपयोगी है और क्या केवल परिचित लगता है। वृषभ के सूर्य की चर्चा में यह फर्क उपयोगी उदाहरण है। पूरी व्याख्या शुक्र और सूर्य के भाव को भी देखेगी; इससे किसी खरीद या निवेश की सफलता नहीं बताई जा सकती।
अपने लिए एक प्रश्न
कौन-सी प्रतिबद्धता अब भी आपके मूल्यों से जुड़ी है और कौन-सी केवल आदत से चल रही है?
सूर्य राशि, चंद्र राशि और लग्न अलग हैं
जन्म राशि का अर्थ वैदिक जन्म-वाचन में प्रायः चंद्र राशि होता है। सूर्य राशि सूर्य की स्थिति बताती है। लग्न जन्म समय पर पूर्व दिशा में उदित राशि है। इसलिए एक ही व्यक्ति की ये तीनों राशियाँ अलग हो सकती हैं।
अयनांश सायन और निरयण राशिचक्र के बीच का अंतर है। Anantrix की सामान्य वैदिक गणना लाहिड़ी अयनांश इस्तेमाल करती है। राशि की सीमा के पास जन्म हो तो जन्म-वर्ष और समय महत्वपूर्ण हैं; केवल तारीखों की सूची पर्याप्त नहीं।
दो लोगों का सूर्य एक राशि में हो सकता है, फिर भी सूर्य का भाव, अन्य ग्रहों से संबंध और पूरा चार्ट अलग होंगे। किसी एक राशि से जीवन की घटना या व्यक्तित्व तय न करें।
अपनी चंद्र राशि अलग से जानेंआगे क्या पढ़ें?
प्रकाशक: Anantrix। उदाहरण परंपरा को समझाने के लिए हैं; वे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित व्यक्तित्व-परीक्षण या भविष्यवाणी नहीं हैं।