अश्विनी · चरण 1 / 4
अश्विनी नक्षत्र 1 चरण
नक्षत्र निरयण राशि-चक्र का 13°20′ का भाग है। उसका प्रत्येक चरण (चौथाई भाग) 3°20′ का होता है। यहाँ इस चरण की स्थिति, नामकरण की परंपरा और पारंपरिक व्याख्या दी गई है।
- निरयण राशि विस्तार
- मेष 0°00′ से 3°20′
- राशि
- मेष
- नवांश (राशि का नौवाँ भाग)
- मेष
- नवांश स्वामी
- मंगल
विस्तार लाहिरी निरयण पद्धति में दिया गया है। आरंभिक बिंदु इस चरण में और अंतिम बिंदु अगले चरण में आता है। अंश बताई गई राशि के भीतर मापे गए हैं। नीचे दिया गणना नोट चुनी हुई पद्धति समझाता है।
चुनी हुई नामकरण ध्वनि
कुछ परिवार नामकरण (नाम रखने का पारंपरिक संस्कार) में चरण की ध्वनि का उपयोग करते हैं। यह वैकल्पिक सांस्कृतिक परंपरा है; अलग परिवारों और परंपराओं की पसंद अलग हो सकती है।
चु · Chu
पारंपरिक व्याख्या
अश्विनी के अश्व-प्रतीक और मंगल के मेष नवांश को परंपरागत व्याख्या में पहल तथा नए आरंभ की गति से जोड़ा जाता है।
अश्विनी नक्षत्र का पहला चौथाई भाग चरण 1 है। यह मंगल के स्वामित्व वाले मेष नवांश में आता है; नवांश राशि का नौवाँ भाग है। अश्विनी का पारंपरिक अश्व-प्रतीक गति और आरंभ का संदर्भ देता है।
अश्व और मंगल के प्रतीकों को साथ पढ़ने पर पहला कदम उठाना, तुरंत प्रतिक्रिया देना और परिस्थिति के अनुसार गति चुनना जैसे विषय सामने आ सकते हैं। ये प्रतीकों को दिए गए अर्थ हैं; इन्हें इस चरण से जुड़े हर व्यक्ति का स्वभाव नहीं माना जा सकता। उदाहरण के लिए, नई योजना शुरू करते समय उपयोगी पहला कदम उठाने और जरूरी प्रश्न को जल्दबाजी में छोड़ देने का अंतर देखें।
अकेला यह चरण स्वभाव, पेशा, स्वास्थ्य या संबंधों के परिणाम निर्धारित नहीं करता। व्यक्तिगत व्याख्या के लिए पूर्ण जन्म-कुंडली में चंद्र की राशि, भाव, दृष्टियाँ तथा मंगल और अन्य ग्रहों की स्थिति देखनी होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अश्विनी चरण 1 की नामकरण ध्वनि क्या है?
यहाँ नामकरण की चयनित ध्वनि (चु) है। कुछ परिवार पारंपरिक नामकरण संस्कार में इसे अपनाते हैं। यह वैकल्पिक प्रथा है और बच्चे का भविष्य इससे तय नहीं होता।
अश्विनी चरण 1 किस नवांश में है?
अश्विनी चरण 1 मेष नवांश में आता है, जिसके स्वामी मंगल हैं।
अश्विनी चरण 1 से क्या समझ सकते हैं?
पारंपरिक प्रतीकों से पहल और गति पर विचार किया जा सकता है। किसी व्यक्ति पर यह अर्थ लागू करने से पहले पूर्ण जन्म-कुंडली देखनी होती है।
यह पृष्ठ कैसे गणना करता है
मुख्य ध्वनि अनंतृक्ष की चुनी हुई पद्धति के अनुसार है। देवनागरी ध्वनि को स्पष्ट करती है और प्रचलित रोमन वर्तनी पहचान व खोज में सहायता करती है। पारंपरिक नामकरण तालिकाओं में कभी-कभी अंतर मिलता है, इसलिए उपयोगी वैकल्पिक वर्तनियाँ दिखाई जाती हैं और किसी एक वर्तनी को सार्वभौमिक नहीं माना जाता। नवांश अग्नि, पृथ्वी, वायु और जल राशियों के मानक दोहराव का अनुसरण करता है और हर चरण लाहिरी निरयण राशि-चक्र में बराबर 3°20′ का होता है।
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