पुष्य · चरण 3 / 4
पुष्य नक्षत्र 3 चरण
नक्षत्र निरयण राशि-चक्र का 13°20′ का भाग है। उसका प्रत्येक चरण (चौथाई भाग) 3°20′ का होता है। यहाँ इस चरण की स्थिति, नामकरण की परंपरा और पारंपरिक व्याख्या दी गई है।
- निरयण राशि विस्तार
- कर्क 10°00′ से 13°20′
- राशि
- कर्क
- नवांश (राशि का नौवाँ भाग)
- तुला
- नवांश स्वामी
- शुक्र
विस्तार लाहिरी निरयण पद्धति में दिया गया है। आरंभिक बिंदु इस चरण में और अंतिम बिंदु अगले चरण में आता है। अंश बताई गई राशि के भीतर मापे गए हैं। नीचे दिया गणना नोट चुनी हुई पद्धति समझाता है।
चुनी हुई नामकरण ध्वनि
कुछ परिवार नामकरण (नाम रखने का पारंपरिक संस्कार) में चरण की ध्वनि का उपयोग करते हैं। यह वैकल्पिक सांस्कृतिक परंपरा है; अलग परिवारों और परंपराओं की पसंद अलग हो सकती है।
हो · Ho
पारंपरिक व्याख्या
शुक्र के तुला नवांश में पुष्य की सहायता संबंधी व्याख्या पारस्परिकता, अनुपात और साझा जिम्मेदारी से जुड़ सकती है।
पुष्य चरण 3 शुक्र के तुला नवांश में आता है। चरण नक्षत्र का चौथाई भाग और नवांश राशि का नौवाँ भाग है। पारंपरिक व्याख्या में पुष्य की पोषण वाली छवि को तुला के तराजू के साथ पढ़ा जाता है।
इस मेल में सहायता देने और पाने पर विचार किया जा सकता है। शुक्र के संबंध और तुला के अनुपात वाले प्रतीक अलग जरूरतों को स्वीकार करने तथा साझा व्यवस्था पर सहमति बनाने की ओर ध्यान ला सकते हैं। साझा जिम्मेदारी में हर व्यक्ति का योगदान तय करना ऐसी देखभाल दिखाता है जिसमें सहायता देने वाले की जरूरत भी शामिल है।
यह चरण दयालुता, निष्पक्षता, साझेदारी की गुणवत्ता, पेशा या स्वास्थ्य निर्धारित नहीं करता। व्यक्तिगत व्याख्या के लिए पूर्ण जन्म-कुंडली में शुक्र की स्थिति और चंद्र की राशि, भाव तथा दृष्टियाँ देखनी होती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पुष्य चरण 3 की नामकरण ध्वनि क्या है?
यहाँ नामकरण की चयनित ध्वनि (हो) है। कुछ परिवार पारंपरिक नामकरण संस्कार में इसे अपनाते हैं। यह वैकल्पिक प्रथा है और बच्चे का भविष्य इससे तय नहीं होता।
पुष्य चरण 3 किस नवांश में है?
पुष्य चरण 3 तुला नवांश में आता है, जिसके स्वामी शुक्र हैं।
पुष्य चरण 3 से क्या समझ सकते हैं?
सहायता में पारस्परिकता एक संभावित प्रतीकात्मक विषय है। इससे नैतिक गुण तय नहीं होते और संबंध में सामंजस्य की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।
यह पृष्ठ कैसे गणना करता है
मुख्य ध्वनि अनंतृक्ष की चुनी हुई पद्धति के अनुसार है। देवनागरी ध्वनि को स्पष्ट करती है और प्रचलित रोमन वर्तनी पहचान व खोज में सहायता करती है। पारंपरिक नामकरण तालिकाओं में कभी-कभी अंतर मिलता है, इसलिए उपयोगी वैकल्पिक वर्तनियाँ दिखाई जाती हैं और किसी एक वर्तनी को सार्वभौमिक नहीं माना जाता। नवांश अग्नि, पृथ्वी, वायु और जल राशियों के मानक दोहराव का अनुसरण करता है और हर चरण लाहिरी निरयण राशि-चक्र में बराबर 3°20′ का होता है।
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